वह कौन है ?

कुछ तो है जो सालता है
भीतर ही भीतर
कचोटता है,
कुछ ताे है जो छूट गया है
पीछे बहुत पीछे
जाने कहाँ
अपने से अलग
वह मैं ही हूं.

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