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वह कौन है ?

कुछ तो है जो सालता है भीतर ही भीतर कचोटता है, कुछ ताे है जो छूट गया है पीछे बहुत पीछे जाने कहाँ अपने से अलग वह मैं ही हूं.

तुम अब भी वहीं हो

 तुम अब भी वहीं हो जहाँ जहाँ तुम थीं बैठ कर टीवी देखती खिडकी से बाहर ताकती अपने तुलसी के पौधे को निहारती  बच्चों से बतियाती घर में इधर उधर टहलती और मेरे अन्तर्मन में .